हम जैसा सोचते हैं, वैसा ही हमारा जीवन बनता है। हमारी सोच कैसी है, इसके मूल में हमारे विचार होते हैं। सद्ग्रंथों के अध्ययन से हमारे मन में अच्छे विचार आते हैं। सद्ग्रंथ एक सार्थक चिंतन पैदा करने के लिए बड़ा साधन हैं। निरंतर अध्ययन करने की और सकारात्मक मनन करने की प्रेरणाएं ग्रंथ ही देते हैं। आज जूनापीठाधीश्वर आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी अवधेशानंद जी गिरि के जीवन सूत्र में जानिए किस वजह से जीवन का विकास रुक सकता है? आज का जीवन सूत्र जानने के लिए ऊपर फोटो पर क्लिक करें।

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